“Oh, your company's side, you do not listen to me; For your sake, I recited what and what things I heard.”
मेरे साथ रहने वाली कंपनी की ओर, तुम मेरी बात नहीं सुनते; तेरे लिए, मैंने क्या-क्या सुना, मैंने सुना क्या-क्या कुछ।
यह शेर एक तरफ़ा मोहब्बत का दर्द बयां करता है। शायर कहते हैं कि मेरे महबूब, मैं तेरे लिए अपनी सोहबत की राह भी छोड़ सकता हूँ। लेकिन सबसे बड़ी तकलीफ ये है कि तू मेरी एक बात भी सुनता नहीं। यह सिर्फ़ बिछड़ने का दर्द नहीं है, बल्कि यह उस बेसुनी का दर्द है, जहाँ दिल की हर बात अनसुनी रह जाती है। एक बहुत ही गहरा दर्द है यह!
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