“Oh, do not ask, cruel one, what all was there to us Of your eyes of grace, kindness, affection, and loyalty.”
अरे, मत पूछ, सताने वाले, कि तुझसे हमें क्या-क्या मिला था; कृपा, करम, प्यार और वफ़ा की तेरी आँखों से क्या-क्या कुछ।
यह शेर महबूब से एक नफासत भरी गुहार है, जिन्हें 'सितमगार' कहकर संबोधित किया गया है। शायर कह रहे हैं, 'यह मत पूछो कि हमने तुमसे क्या-क्या पाया।' इस गहराई से पता चलता है कि महबूब का प्रभाव—चाहे वह अच्छा रहा हो या बुरा—इतना गहरा था कि उसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। यह प्रेम की यादों की अथाह गहराई को दर्शाता है।
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