एक महरूम चले 'मीर' हमें 'आलम से
वर्ना 'आलम को ज़माने ने दिया क्या क्या कुछ
“A deprived soul walks, 'Mir,' away from this world, Or what has the world given to the ages, 'Alam'?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
एक निर्धन या वंचित व्यक्ति, मीर, दुनिया से चला जाता है, या दुनिया ने युगों को क्या-क्या दिया है, आलम?
विस्तार
यह शेर जीवन के इस गहरे फ़लसफ़े को बयान करता है। मीर तक़ी मीर कहते हैं कि अगर मैं इस दुनिया को छोड़ भी दूँ, तो कोई बड़ी बात नहीं.... क्योंकि ज़माने ने इस पूरे आलम को इतना कुछ दिया है। यह एक तरह का विरक्ति का एहसास है, कि हमारा जीवन बस एक कहानी का हिस्सा है, और यह दुनिया अपने आप में ही पूर्ण है।
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