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पर कहूँ क्या रक़म शौक़ की अपने तासीर हर सर-ए-हर्फ़ पे वो कहने लगा क्या क्या कुछ

But what shall I recount of my ardent passion's deep effect?At every letter's start, 'What is this?' he would reflect.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैं अपनी पसंद (शौक़) का मूल्य (रक़म) कैसे बताऊँ? वह हर शब्द (हर्फ़) पर कुछ न कुछ कहने लगा।

विस्तार

यह शेर उस उलझन को बयां करता है जब आप अपनी भावनाओं को शब्दों में कैसे व्यक्त करें। शायर अपने इश्क़ के शौक़ की रक़म (माप) पूछ रहे हैं, लेकिन साथ ही यह भी बता रहे हैं कि महबूब हर लफ़्ज़ पर इतना कुछ कह रहा है कि शायर खुद ही यह सोचने पर मजबूर हो गया है कि इन बातों का क्या मतलब है। यह एक बहुत ही गहरा अहसास है।

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