सियह-तालई मेरी ज़ाहिर है अब — मीर तक़ी मीर

सियह-तालई मेरी ज़ाहिर है अब नहीं शब कि उस से लड़ाई नहीं

“My existence at the lake is now manifest, There is no fight against the night.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

सियह-तालई मेरी अब जाहिर है, और न रात से कोई लड़ाई है।

विस्तार

यह शेर अंदरूनी उथल-पुथल की बात करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि उनका 'सियह-तालई' यानी काली उदासी अब सबके सामने आ गई है। इसलिए उन्हें यह नहीं लगता कि लड़ाई सिर्फ रात से है। असल जंग तो कहीं और है... वो जंग जो दिल के अंदर होती है। यह एक गहरा आत्म-बोध है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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