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पशेमान तौबा से होगा 'अदम में
कि ग़ाफ़िल चला शैख़ लुत्फ़-ए-हवा से

With repentance, the heart will find peace, But heedless, the Shaikh wandered in the breeze.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

पश्चाताप और तौबा से मन को शांति मिलेगी, लेकिन वह शैख़ (संत) हवा के नशीले प्रभाव में मदहोश होकर चला गया।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब की गहन आध्यात्मिक बात है। शायर कहते हैं कि इंसान का असली 'अदम' या अस्तित्व, केवल पछतावे और तौबा से ही शुद्ध हो सकता है। जो लोग इस बात से बेख़बर हैं, वे तो बस हवा के झोंके के पीछे भागते हुए गुज़र जा रहे हैं। यह एक गहरी नसीहत है कि हमें अपनी ज़िंदगी को बस गुज़रने नहीं देना चाहिए।

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