पड़ा है फूल घर में काहे को 'मीर' — मीर तक़ी मीर
पड़ा है फूल घर में काहे को 'मीर'
झमक है गुल की बर्क़-ए-आशियाँ है
“Why has the flower fallen in the house, O Mir? The blossom's glory is in its nest.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मीर से पूछा जा रहा है कि फूल घर में क्यों गिरा है, क्योंकि गुल की चमक (या महिमा) तो उसके घोंसले में है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरे फ़लसफ़े को बयान करता है। शायर पूछ रहे हैं कि फूल को घर में क्यों पड़ा रहना चाहिए। उनका कहना है कि असली चमक, असली रौनक तो गुलशन की बिजली में है। यह पंक्तियाँ हमें सिखाती हैं कि जीवन की सबसे बड़ी खूबसूरती और सबसे बड़ा जोश... वो सुरक्षित कोनों में नहीं, बल्कि खुले आसमान के नीचे मिलता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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