हमें जिस जाए कल ग़श आ गया था
वहीं शायद कि उस का आस्ताँ है
“The place where I once lost consciousness, / Perhaps that is the threshold of that person.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जिस जगह कल मेरा बेहोश हो जाना था, शायद वह उस व्यक्ति का दहलीज है।
विस्तार
यह शेर मोहब्बत के उस गहरे असर को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि जिस जगह पर कल उनका ग़श आ गया था... वह जगह इतनी क़रीब और इतनी ख़ास है कि वह तो महबूब के दरवाज़े पर ही लगती है। यह वो इश्क़ है जो इतना गहरा हो कि बस पास होने से ही रूह का वजूद हिल जाए।
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