बाहम सुलूक था तो उठाते थे नर्म गर्म काहे को 'मीर' कोई दबे जब बिगड़ गई

“If the conduct had been gentle and soft, Why did 'Mir' have to see it broken and aloft?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

यदि आचरण को कोमल और मधुर रखा जाता, तो 'मीर' को इसे टूटी हुई और ऊँची अवस्था में क्यों देखना पड़ा?

विस्तार

यह शेर एक बहुत ही गहरा अहसास बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि जब हमारा रिश्ता या हमारा व्यवहार बहुत ही नर्म और मीठा होता है, तो हम हर चीज़ को संभालकर करते हैं। लेकिन जब हालात बिगड़ जाते हैं, जब वो मिठास खत्म हो जाती है, तो फिर कोई हमें दबे क्यों? यह सवाल सिर्फ़ एक शिकायत नहीं है... यह तो एक ज़बरदस्त विद्रोह है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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