सुब्हा-गर्दां ही 'मीर' हम तो रहे दस्त-ए-कोताह ता-सुबू न गया

“O Mir, I remained here, though your hand was short; I did not pass away from your presence.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

शायर (मीर) कह रहे हैं कि वे अभी भी यहीं हैं, भले ही आपका हाथ छोटा था; वह आपकी उपस्थिति से दूर नहीं हुए।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने जीवन के सबसे गहरे डर को बयां किया है। 'सुब्हा-गर्दां' का मतलब है भयानक तड़प या मुश्किलों का दौर। शायर कहते हैं कि हमें कठिनाइयों से डर नहीं लगना चाहिए। असली डर तो उस पल का है, जब हमें कोई फ़ैसला लेना होता है—वो 'दम घुटने' वाली स्थिति। यह ज़िंदगी के उस मोड़ पर खड़े होने जैसा है, जहाँ एक कदम आगे और नहीं रखा जा सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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