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हर क़दम पर थी उस की मंज़िल लेक सर से सौदा-ए-जुस्तजू गया

At every step, was her destination's path, My quest for her, my life's trade, did not depart.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हर कदम पर उस की मंज़िल का रास्ता था, पर मेरे जीवन का खोज-ढूँढना (सौदा-ए-जुस्तजू) कहीं गया नहीं।

विस्तार

यह शेर उस मुसाफ़िर की उलझन को बयां करता है जिसके लिए मंज़िल साफ़ दिख रही है, लेकिन दिल को सुकून नहीं मिल रहा। शायर कहते हैं कि हर कदम पर उसका रास्ता साफ़ था, फिर भी दिमाग में 'तलाश' का सौदा नहीं छोड़ा। इसका मतलब है कि कभी-कभी, जब मंज़िल इतनी पास होती है, तब भी हम अपने अंदर की चाहत के कारण रुक जाते हैं। यह सफर और मंजिल के बीच के फर्क को दिखाता है।

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