अब सब के रोज़गार की सूरत बिगड़ गई लाखों में एक दो का कहीं कुछ बनाओ है

“Now the prospects of all livelihoods have deteriorated, How can one make a living out of a mere handful of coins?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

अब सभी के रोज़गार की स्थिति खराब हो गई है, कि लाखों में से एक-दो पैसे से गुजारा कैसे किया जाए।

विस्तार

यह शेर बहुत ही गहरा सामाजिक अवलोकन है। मिर् तक़ी मीर कहते हैं कि आज हर किसी के लिए रोज़गार की सूरत बिगड़ गई है। शायर बताते हैं कि लाखों लोगों में भी, बस एक या दो लोग जो अपना गुज़ारा करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए भी जीवन जीना कितना मुश्किल हो गया है। यह पंक्ति जीवन की मूलभूत चुनौतियों को दर्शाती है।

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