शहर के शोख़ सादा-रू लड़के
ज़ुल्म करते हैं क्या जवानों पर
“Do the city's charming, simple-looking boys Commit such atrocities against the youth?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शहर के शोख़ सादा-रू लड़के, क्या जवानों पर ज़ुल्म करते हैं।
विस्तार
यह शेर खूबसूरती से उस छल को बयान करता है जो नज़दीकी में छुपा होता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि शहर के वो शोख़ सादा-रू लड़के... क्या वो सचमुच जवानों पर ज़ुल्म करते हैं? यह सवाल उस महबूब से है, जो अपनी मासूमियत के पीछे एक गहरा असर रखती है। यह एहसास हर आशिक़ को होता है कि जो सबसे प्यारा होता है, वो सबसे ज़्यादा चोट भी पहुँचा सकता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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