सुध ले घर की भी शोला-ए-आवाज़
दूद कुछ आशियाँ से उठता है
“Be mindful of the blaze of sound from home, A little rises from the nest of the cow.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर कहता है कि घर की आवाज़ का शोला भी ध्यान में रखना, क्योंकि गाय के घोंसले से कुछ आवाज़ उठ रही है।
विस्तार
यह शेर हमें जीवन के उस गहरे पहलू से मिलाता है, जहाँ शांति के बावजूद एक ऊर्जा हमेशा मौजूद रहती है। शायर कहते हैं कि घर की खामोशी में भी आवाज़ की एक लौ जल रही है। यह लौ हमें बताती है कि भावनाओं और बातों का प्रवाह कभी रुकता नहीं। यह कोमल ऊर्जा, जैसे घोंसलों से दूध का निकलना, बताता है कि खुशियाँ और बातें अचानक, अप्रत्याशित रूप से उभर सकती हैं।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
