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टुक तर्क-ए-'इश्क़ करिए लाग़र बहुत हुए हम
आधा नहीं रहा है अब जिस्म-ए-रंज-फ़र्सा

Oh, please make your arguments of love, for we have become too attached; My body, which is afflicted by sorrow, cannot endure half of it.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ऐसी प्रेम की तर्क-बातें करने से हम बहुत तंग हो गए हैं; मेरा दुःख से भरा शरीर अब आधा भी नहीं सह सकता।

विस्तार

यह शेर एक ऐसे आशिक़ की हालत बयां करता है जो प्यार के दिखावे से थक चुका है। शायर कहते हैं कि अब यह 'इश्क़' का नाटक बंद हो जाए, क्योंकि हम बहुत थक चुके हैं। दूसरी लाइन में दर्द को इतना गहरा कर दिया है कि शरीर भी जवाब दे गया है। यह सिर्फ़ दिल का नहीं, बल्कि जिस्म का दर्द है—एक ऐसा दर्द जो आधा भी नहीं सहा जा सकता।

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