वा'इज़ को ये जलन है शायद कि फ़रबही से
रहता है हौज़ ही में अक्सर पड़ा मगर सा
“Perhaps the preacher feels jealousy because from Farbahi, He often lies in the basin, but in a different manner.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायद वा'इज़ को जलन है कि फ़रबही से, जो अक्सर हौज़ में पड़ा रहता है, लेकिन किसी अलग ढंग से।
विस्तार
यह शेर पाखंड और दिखावे पर एक गहरा प्रहार है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि शायद इस वा'इज़ को फ़र्बही की सुंदरता से जलन होती है। शायर समझा रहे हैं कि वह भले ही अक्सर हौज़ में पाए जाते हों, लेकिन उनकी उपस्थिति या उनका धर्म सिर्फ़ एक दिखावा है—एक गहरा एहसास नहीं। यह बाहरी दिखावे और असली सच्चाई के बीच का अंतर बताता है।
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