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तुम वाकि़फ़-ए-तरीक़-ए-बेताक़ती नहीं हो
याँ राह-ए-दो-क़दम है अब दूर का सफ़र सा

You are not acquainted with the path of tireless effort, This road is now like a journey of two steps' distance.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

तुम वाकिफ़ नहीं हो कि यह रास्ता निरंतर प्रयास का है, यह राह तो अब दो क़दम दूर के सफ़र जैसी है।

विस्तार

यह शेर भावनात्मक निराशा की गहराई को समझाता है। शायर कहते हैं कि आप उस 'बेताक़ती' के रास्ते को नहीं जानते। उनके लिए, बस दो क़दम की दूरी भी अब एक बहुत लंबे सफ़र जैसी है। यह दिखाता है कि जब दिल टूटने लगता है, तो छोटी सी दूरी भी बहुत मुश्किल लगने लगती है।

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