इम्काँ नहीं जीते-जी हो इस क़ैद से आज़ाद
मर जाए तभी छूटे गिरफ़्तार-ए-मोहब्बत
“I cannot live in this captivity, I must be freed; Only when I die will I be released from the bondage of love.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जीते-जी इस कैद से आज़ाद होना संभव नहीं है; महबूब के बंधन से तभी मुक्ति मिलेगी जब मैं मर जाऊंगा।
विस्तार
यह शेर प्रेम की उस गहराई को बयान करता है, जहाँ से निकलना नामुमकिन होता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि यह इश्क़ की क़ैद.... ज़िंदा होकर भी आज़ाद होना मुमकिन नहीं। इस बंधन से मुक्ति तो बस मौत से ही मिलेगी। यह एहसास दिलाता है कि कभी-कभी प्यार एक खूबसूरत जेल जैसा लगता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
