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रू-ए-सुख़न है कीधर अहल-ए-जहाँ का या रब
सब मुत्तफ़िक़ हैं इस पर हर एक का ख़ुदा है

It is the nature of speech, O Lord, of the people of the world, that Everyone agrees on this: that every person has a God.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हे रब, यह दुनिया के लोगों की प्रकृति है कि सभी इस बात पर सहमत हैं कि हर व्यक्ति का अपना ख़ुदा है।

विस्तार

यह शेर इंसानियत की समझ पर एक बहुत गहरा सवाल उठाता है। शायर कहते हैं कि दुनिया में सच का कोई एक ठिकाना नहीं.... हर कोई अपने नज़रिया, अपने धर्म को ही सबसे बड़ा मान बैठा है। यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या आज के दौर में कोई एक साझा समझ बची है या नहीं!

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