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फिरते हो 'मीर' साहब सब से जुदे जुदे तुम
शायद कहीं तुम्हारा दिल इन दिनों लगा है

O Mir, you wander, separated from everyone, Perhaps your heart has found affection somewhere these days.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मीर साहब, आप हर किसी से अलग-अलग घूम रहे हैं, शायद इन दिनों आपका दिल कहीं और लग गया है।

विस्तार

यह शेर उस बेचैनी को बयां करता है, जो तब होती है जब दिल कहीं और लगने लगता है। शायर साहब कहते हैं कि आप हर जगह बिखरे हुए हैं, हर किसी से दूर हैं। यह सिर्फ़ एक इल्ज़ाम नहीं है, बल्कि एक गहरा एहसास है... कि कहीं न कहीं आपका दिल, कोई नया ठिकाना ढूंढ रहा है। यह इश्क़ की उलझन है, जो इंसान को बेघर कर देती है।

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