है गरचे तिफ़्ल-ए-मकतब वो शोख़ अभी तो लेकिन जिस से मिला है उस का उस्ताद हो मिला है

“Though he may be a mischievous student of the school, But the master he has met is truly great.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

स्कूल का बच्चा भले ही शरारती हो, लेकिन जिस उस्ताद से वह मिला है, वह महान है।

विस्तार

इस शेर में शायर ने एक बहुत गहरा फ़र्क़ बताया है। देखिए, मक़तब का बच्चा, यानी कि नौजवान, भले ही कितना भी शोख़ और चंचल क्यों न हो... लेकिन उसका असली आधार, उसकी पहचान... वो उस उस्ताद से मिलती है जिसे उसने देखा है। शायर कह रहे हैं कि दिखावा तो पल भर का है, पर ज्ञान का स्रोत अमर होता है।

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