मुशफ़िक़ मलाज़ ओ क़िबला काबा ख़ुदा पयम्बर
जिस ख़त में शौक़ से मैं क्या क्या उसे लिखा है
“Mushfiq Malaz, O Qibla Kaaba, God and Prophet, In the letter, what all desires have I written to him.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मुशफ़िक़ मलाज़, ओ क़िबला काबा, ख़ुदा और पयम्बर, उस ख़त में शौक़ से मैं क्या-क्या उसे लिखा है।
विस्तार
इस शेर में शायर ने उस गहरे जुनून को बयान किया है जो हम अपने अहसासों को कागज़ पर उतारने में लगाते हैं। यह सिर्फ़ ख़त लिखना नहीं है, बल्कि दिल का हर एक एहसास उस ख़त में ज़िंदा हो जाता है। शायर कहते हैं कि हमारा शौक़ इतना गहरा है.... कि शब्दों की गिनती करना भी नामुमकिन है। यह प्रयास ही हमारी पहचान बन जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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