नाकाम रहने ही का तुम्हें ग़म है आज 'मीर' — मीर तक़ी मीर
“Oh Meer, what sorrow do you feel today, For failing at tasks, your whole life has passed away.”
अर्थ
हे मीर, आज तुम्हें असफल रहने का क्या गम है? तुम्हारा पूरा जीवन बहुत से कार्यों में बीत गया है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरी बात कहता है। शायर कह रहे हैं कि आज तुम्हें बस इसलिए गम है क्योंकि तुम नाकाम रहे.... लेकिन क्या तुम्हें पता है कि इस दुनिया में कितने लोगों के काम, कितनी जिंदगियां पूरी हो चुकी हैं? यह एक तरह का तंज है.... जो हमें सिखाता है कि न सिर्फ अपनी विफलता पर दुखी न हों, बल्कि ज़िंदगी के इस बड़े सफ़र को समझना भी ज़रूरी है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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