ग़ालिब ये है कि मौसम-ए-ख़त वाँ क़रीब है — मीर तक़ी मीर
ग़ालिब ये है कि मौसम-ए-ख़त वाँ क़रीब है
आने लगा है मुत्तसिल उस का पयाम याँ
“Ghalib, it is that the season of love is near, His continuous message is arriving, my friend.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ग़ालिब, यह है कि इश्क़ का मौसम नज़दीक है; उसका लगातार संदेश आ रहा है, मेरे दोस्त।
विस्तार
यह शेर इंतज़ार और बिछड़ने के दर्द का बेहतरीन मेल है। शायर कह रहे हैं कि बिछड़ने का मौसम तो करीब आ चुका है.... लेकिन साथ ही, महबूब का पैगाम लगातार आता जा रहा है। यह एक अजीब विरोधाभास है! दिल उम्मीद और निराशा के बीच झूल रहा है। जैसे, दूर जाना तय है, पर यादें और बातें रुक नहीं रही हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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