बे-रवी ओ ज़ुल्फ़-ए-यार है रोने से काम याँ — मीर तक़ी मीर

बे-रवी ओ ज़ुल्फ़-ए-यार है रोने से काम याँ दामन है मुँह पे अब्र-ए-नमत सुब्ह-ओ-शाम याँ

“Oh beloved, your tresses are a source of tears, what remedy is there? Or is this veil of grace, upon the face, a cloud of displeasure, morning and evening?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हे प्रिय, तुम्हारे बाल रोने का कारण हैं, अब क्या उपाय है? या यह कृपा का घूंघट, सुबह और शाम, displeasure का बादल है।

विस्तार

यह शेर उस आशिक़ के गहरे इश्क़ और बेचैनी को बयां करता है। शायर महबूब से कह रहे हैं कि आपके ज़ुल्फ़ें ही रोने के लिए काफ़ी हैं, इतनी कि आँसू कभी रुकेंगे नहीं। और सिर्फ़ ज़ुल्फ़ें नहीं, बल्कि आपका दामन भी... यह सुबह और शाम, दिन-रात एक नज़ारे जैसे बादल की तरह नूर बरसाता है। यह इबादत है, और यह एक दर्द भी है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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