कहीं जो कुछ मलामत गर बजा है 'मीर' क्या जानें — मीर तक़ी मीर
कहीं जो कुछ मलामत गर बजा है 'मीर' क्या जानें
उन्हें मा'लूम तब होता कि वैसे से जुदा होते
“Oh Meer, how can you know what blemishes have been played? They only know it when they are separated from that way.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कहीं जो कुछ कमियाँ हैं, शायर कैसे जान सकते हैं? उन्हें तो यह बात तब पता चलती है जब वे उस राह से अलग होते हैं।
विस्तार
यह शेर दर्द और हक़ीक़त के रिश्ते को समझाता है। शायर कहते हैं कि किसी की कमियाँ या नक़ائص तब तक किसी को दिखाई नहीं देते, जब तक वह आपके पास होता है। असल सच्चाई.... सिर्फ़ दूरी से ही समझ आती है। यह एक बहुत गहरा तफ़कर है कि किस तरह बिछड़ना ही हमें अपनी और महबूब की असली क़ीमत सिखाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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