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अब ऐसे हैं कि साने' के मिज़ाज ऊपर बहम पहुँचे
जो ख़ातिर-ख़्वाह अपने हम हुए होते तो क्या होते

Now, the mood of the beloved has ascended to heights of delusion; If only our desires had been fulfilled, what would we be now?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

अब ऐसा है कि साने' के मिज़ाज पर भ्रम छा गया है; अगर हमारी चाहतें पूरी होतीं तो हम क्या होते।

विस्तार

मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब ने यहाँ दिल की गहरी उलझन को बयां किया है। शायर कह रहे हैं कि महबूब का मिज़ाज इतना बेख़बर है कि आशिक़ पूरी तरह से बहम में है। और फिर वह सोचते हैं कि काश! जो लोग सच में फ़िक्र करते, जो उनके हमदर्द होते, वे उनके साथ होते.... तो ज़िन्दगी कितनी अलग होती!

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