दूर बैठा ग़ुबार-ए-'मीर' उस से
इश्क़ बिन ये अदब नहीं आता
“How the dust of 'Mir' sits far away from him, This decorum does not come without love.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दूर बैठे मिर्ज़ा ग़ालिब के ग़ज़ल के असर से, यह शिद्दत का नज़ाकत भरा अंदाज़ नहीं आ सकता।
विस्तार
ये शेर सिर्फ शायरी नहीं है, ये ज़िंदगी का फ़लसफ़ा है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि आप कितने भी महान क्यों न हों, आपकी जो शान, जो नज़ाकत है... वो बिना सच्चे इश्क़ के नहीं आ सकती। शायर यहाँ बता रहे हैं कि सच्चा अदब, असली गरिमा, वो है जो दिल से निकलती है। यह एक गहरा एहसास है जो हमें बताता है कि मोहब्बत ही हमारी पहचान है।
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