आलम में लोग मिलने की गों अब नहीं रहे हर-चंद ऐसा वैसा तो आलम बहुत है याँ

“In this world, people no longer seek meeting points, For in this world, there are so many kinds of scenes.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

इस दुनिया में अब मिलने लायक सच्चे लोग नहीं रहे। हालाँकि यहाँ साधारण और दिखावटी लोगों की कोई कमी नहीं है, लेकिन वे गहरी शख्सियतें अब नहीं मिलतीं।

विस्तार

यह शेर एक गहरे अकेलेपन और बदलाव की बात करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि आज के दौर में लोगों के मिलने-जुलने का वो सहज, सादा तरीक़ा नहीं रहा। दुनिया इतनी जटिल हो गई है, कि हर तरह की चीज़ें और दिखावे ने असली इंसानी रिश्ते को कहीं खो दिया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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