आ जाएँ हम नज़र जो कोई दम बहुत है याँ
मोहलत हमें बिसान-ए-शरर कम बहुत है याँ
“If only we could find a moment, even a little, to see your gaze, For this delay, this separation, we need just a little less.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर हम यहाँ कुछ पल के लिए भी नज़र आ जाएँ तो बहुत है; यहाँ हमारे पास एक चिंगारी की तरह बहुत ही कम समय और मोहलत है।
विस्तार
यह शेर इश्क़ के उस नशा को बयां करता है, जहाँ नज़र का एक पल भी वियोग नहीं देता। शायर कह रहे हैं कि महबूब की निगाहों से दूर होना... ये नामुमकिन है। और उस नज़र से पैदा हुई आग को बुझाना... ये तो और भी मुश्किल है! यह उस बेचैनी और समर्पण की बात है जो इश्क़ हमें सिखाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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