वज्द हो बुलबुल-ए-तस्वीर को जिस की बू से उस से गुल-रंग का दा'वा करे फिर किस रू से

“If its fragrance stirs even a painted nightingale to ecstasy, with what face can the rose-hued one dare claim equality?”

— मीर अनीस
अर्थ

जिसकी खुशबू से तस्वीर में बनी बेजान बुलबुल भी वज्द और मस्ती में आ जाए, भला कोई गुल-रंग किस मुँह से उसकी बराबरी का दावा कर सकता है।

विस्तार

इस शे'र में शायर ने महबूब की खुशबू का ऐसा करिश्मा दिखाया है जो बेजान चीज़ों में भी रूह फूंक दे। सोचिए, तस्वीर में कैद एक बेजान बुलबुल भी उस महक को पाकर दीवानगी और वज्द के आलम में झूम उठती है। जब एक बेजान तस्वीर का यह हाल है, तो फिर दुनिया का कोई भी गुलाब या खूबसूरत चेहरा उस महबूब के सामने अपनी बराबरी का दावा किस मुंह से कर सकता है?

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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