ज़माना एक तरह पर कभी नहीं रहता इसी को अहल-ए-जहाँ इंक़िलाब समझे हैं

“The world never abides in one unchanging state; this alone the people of the world mistake for revolution.”

— मीर अनीस
अर्थ

ज़माना कभी भी एक ही हालत में नहीं रहता, और दुनिया के लोग इसी स्वाभाविक बदलाव को इंक़िलाब (क्रांति) समझ बैठे हैं।

विस्तार

शायर यहाँ एक बड़ी गहरी और मुस्कुराती हुई सच्चाई बयान कर रहे हैं। वक़्त की तो फ़ितरत ही बदलना है, वह कभी एक जैसा नहीं ठहरता, लेकिन दुनिया वाले ज़रा से फेरबदल को भी कोई महान 'इंक़िलाब' समझ बैठते हैं। यह शेर हमें समझाता है कि हालात का यूँ ही करवट ले लेना कोई असली क्रांति नहीं है, बल्कि यह तो दुनिया की रोज़मर्रा की बेक़रारी का बस एक सहज हिस्सा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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