अजब नहीं है जो शीशों में भर के ले जाएँ इन आँसुओं को फ़रिश्ते गुलाब समझे हैं

“It would be no wonder if they fill their phials and carry them away; the angels have mistaken these tears for rosewater.”

— मीर अनीस
अर्थ

अगर फ़रिश्ते इन आँसुओं को शीशियों में भरकर ले जाएँ तो इसमें कोई ताज्जुब नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने इन आँसुओं को गुलाब का अर्क समझ लिया है।

विस्तार

यहाँ शायर ने सच्चे प्यार और दर्द में बहे आँसुओं को इतनी पाकीज़गी बख़्शी है कि वे आम अश्क नहीं रहे। 'गुलाब' से मुराद यहाँ इत्र या गुलाब-जल से है, जो अपनी रूहानी ख़ुशबू और पवित्रता के लिए जाना जाता है। शायर बड़े लाडले अंदाज़ में कहता है कि अगर फ़रिश्ते भी इन्हें महकता हुआ अर्क़ समझकर अपनी शीशियों में सहेज लें, तो कोई हैरत की बात नहीं; क्योंकि सच्चे दिल से निकला दर्द ख़ुदा के यहाँ भी मुक़द्दस होता है।

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