“Dust yearns for dust in tender love, in restless pain I pine, O Anees; I am destined for Karbala, and Karbala was meant for me.”
अनीस कहते हैं कि मिट्टी को मिट्टी से ही लगाव होता है और वह तड़पते हैं, क्योंकि वह कर्बला के लिए हैं और कर्बला उनके लिए है।
मीर अनीस यहाँ मिट्टी के गहरे रिश्ते को रूहानी मोहब्बत में ढालते हैं। इंसान का वजूद ख़ाक से बना है, और कर्बला की मुक़द्दस मिट्टी के लिए उनका दिल इस तरह तड़प रहा है जैसे दो बिछड़े हुए हिस्से मिलने को बेताब हों। यह शेर एक ऐसा दिली रिश्ता बयां करता है जहाँ शायर ख़ुद को कर्बला के लिए और कर्बला को अपने लिए मुक़द्दर मानता है।
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