मिसाल-ए-माही-ए-बे-आब मौजें तड़पा कीं हबाब फूट के रोए जो तुम नहा के चले

“Like fish cast out of water, the waves writhed in despair; The bubbles burst into weeping as you bathed and walked away.”

— मीर अनीस
अर्थ

जब आप स्नान करके वहां से चले, तो पानी की लहरें बिना पानी की मछली की तरह तड़पती रहीं और बुलबुले फूट-फूट कर रो पड़े।

विस्तार

इस शे’र में शायर का कमाल देखिए—वह कहते हैं कि जब महबूब पानी से नहाकर बाहर निकला, तो पीछे छूटा दरिया भी उसके हिज्र में तड़प उठा। पानी की लहरें ऐसे छटपटाने लगीं जैसे बिन पानी के कोई तड़पती हुई मछली, और उठते बुलबुले फूट-फूट कर रोने लगे। यह महबूब के हुस्न और उसके छूने के अहसास की ऐसी दिलकश दास्तान है, जहाँ खुद बहता पानी भी उसके विरह में रोता हुआ दिखाई देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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