मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे, तुम मिलयां सुख होय।।4।।
“O Lord of Mira, when will you meet me? Upon your meeting, bliss will ensue.”
— मीराबाई
अर्थ
हे मीरा के प्रभु, आप मुझसे कब मिलोगे? आपके मिलने पर ही मुझे सुख की प्राप्ति होगी।
विस्तार
यह दोहा मीराबाई की अपने आराध्य प्रभु के प्रति गहरी लालसा को दर्शाता है। वे अपने प्रभु से पूछ रही हैं, 'हे प्रभु, मैं आपसे कब मिलूँगी?' मीरा का मानना है कि वास्तविक सुख और परम आनंद केवल प्रभु के मिलन में ही है। यह उनकी अटूट भक्ति, प्रेम और आंतरिक शांति की खोज को व्यक्त करता है। उनके लिए, प्रभु से मिलना ही जीवन का परम लक्ष्य है, क्योंकि वे जानती हैं कि सच्ची खुशी और संतोष केवल इसी दिव्य मिलन से प्राप्त होगा।
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