'मीरा' के प्रभु गिरिधर नागर, हरख-हरख जस पायो॥

“Meera's Lord, Giridhar, the clever, with great joy she sang His praise.”

— मीराबाई
अर्थ

मीरा के प्रभु गिरिधर हैं, जो चतुर (नागर) हैं, और मीरा ने अत्यंत प्रसन्नतापूर्वक उनका यशगान किया।

विस्तार

यह पंक्ति मीराबाई की कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और प्रेम को दर्शाती है। इसमें मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु तो सिर्फ गिरिधर नागर हैं, यानी भगवान कृष्ण, जिन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाया था। 'हरख-हरख' का अर्थ है बहुत खुशी से, बार-बार। मीरा अपने प्रभु के यशगान में या उनकी भक्ति में लीन होकर बार-बार बहुत आनंद प्राप्त करती हैं। वह अपने आराध्य के गुणों का बखान करते हुए असीम प्रसन्नता महसूस करती हैं और इसी में उन्हें सच्चा सुख और प्रसिद्धि मिलती है। यह उनके अनन्य प्रेम और अटूट श्रद्धा का सुंदर चित्रण है।

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