सत की नाँव खेवटिया सतगुरू, भवसागर तर आयो।

“With the True Guru as the ferryman of truth's boat, one crosses the ocean of existence.”

— मीराबाई
अर्थ

जब सतगुरु सत्य की नाव के खेवनहार होते हैं, तब व्यक्ति भवसागर को पार कर जाता है।

विस्तार

यह दोहा जीवन के आध्यात्मिक सफर को समझाने के लिए एक सुंदर रूपक का उपयोग करता है। जीवन को एक विशाल, तूफानी सागर की तरह कल्पना करें, जो चुनौतियों और अनिश्चितताओं से भरा है, जिसे 'भवसागर' कहा जाता है। इसे सुरक्षित रूप से पार करने का एकमात्र तरीका एक मजबूत नाव में सवार होना है। यहाँ, वह नाव 'सत्य' है। और इस नाव को सभी तूफानों से बचाकर दूसरे किनारे तक कौन ले जा सकता है? वह 'सतगुरु' हैं – सच्चे शिक्षक या आध्यात्मिक मार्गदर्शक। यह छंद हमें सिखाता है कि सत्य की दृढ़ नाव और एक सच्चे गुरु के कुशल मार्गदर्शन से, हम सभी सांसारिक भ्रमों को सफलतापूर्वक पार कर सकते हैं और मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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