मीरा की प्रभु पीर मिटेगी, जद बैद सांवरिया होय।

“Meera's pain, O Lord, will vanish, when her dark-hued beloved becomes the healer.”

— मीराबाई
अर्थ

मीरा का दर्द, हे प्रभु, तभी मिटेगा जब साँवरिया (श्री कृष्ण) स्वयं वैद्य बन जाएँगे।

विस्तार

यह सुंदर दोहा मीराबाई की अटूट भक्ति को दर्शाता है। इसमें मीरा कहती हैं कि उनकी गहरी आध्यात्मिक पीड़ा और प्रभु मिलन की तड़प तभी मिटेगी जब उनके प्रिय कृष्ण स्वयं उनके वैद्य बनेंगे। वे किसी शारीरिक रोग की बात नहीं कर रही हैं, बल्कि उस गहन विरह वेदना की बात कर रही हैं जो उन्हें ईश्वर से दूर होने पर महसूस होती है। मीरा के लिए, इस अनोखे कष्ट को कोई साधारण चिकित्सक नहीं समझ सकता और न ही उसे दूर कर सकता है। केवल उनके साँवरिया, यानी श्रीकृष्ण ही उनकी आत्मा को शांति दे सकते हैं और उन्हें परम सुख प्रदान कर सकते हैं। यह उनके प्रेम की तीव्रता और कृष्ण के प्रति उनकी पूर्ण शरणागति को उजागर करता है, जिन्हें वे अपना एकमात्र आश्रय और वैद्य मानती हैं।

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