जौहरि की गति जौहरी जाणै, की जिन जौहर होय।
“A gem's true nature, only a gem-expert knows,Or one within whom that very essence flows.”
— मीराबाई
अर्थ
एक रत्न के असली स्वभाव को केवल रत्न पारखी ही जान सकता है, या वह व्यक्ति जिसमें स्वयं वह जौहर (गुण) हो।
विस्तार
यह दोहा हमें सिखाता है कि किसी चीज़ का असली मूल्य केवल वही जान सकता है जो उसका सच्चा पारखी हो। जैसे एक जौहरी ही किसी कीमती रत्न की असली चमक और गुणवत्ता पहचान पाता है, ठीक वैसे ही, किसी व्यक्ति के अंदर की खासियत या उसकी गहरी कला को वही समझ सकता है जिसके पास वैसी ही अंतरात्मा या ज्ञान हो। यह बात इस ओर इशारा करती है कि किसी की सच्ची योग्यता या अनुभवों को सराहने के लिए, आपके पास भी वैसी ही समझ या अनुभव होना चाहिए। असली परख असली विशेषज्ञ ही कर सकता है।
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