ग़ज़ल

मुझे इस तरह से क़ज़ा याद आई

مجھے اس طرح سے قضا یاد آئی
मरीज़· Ghazal· 9 shers

यह ग़ज़ल यादों और भावनाओं के मीठे-कड़वे पहलुओं को दर्शाती है। कवि मृत्यु को इस प्रकार याद करता है जैसे वह कोई औषधि हो, और उसके आँसू किसी दुःख के कारण नहीं बल्कि एक मीठी स्मृति के कारण बहते हैं। यह जीवन की अपूर्णताओं के बोझ को छूती है, पछतावे की छवियों को उजागर करती है, और कैसे एक अकेला, असहाय "ना" कई सहमतियों पर हावी हो सकता है।

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लिपि व अर्थ
1
મને એવી રીતે કઝા યાદ આવી, કોઈ એમ સમજે દવા યાદ આવી.
मृत्यु मेरे मन में इस तरह आई, मानो किसी को लगा हो कि दवा याद आ गई।
2
નથી કોઈ દુઃખ મારાં આંસુનું કારણ હતી એક મીઠી મજા યાદ આવી.
मेरे आँसुओं का कारण कोई दुःख नहीं है। एक मीठी याद आ गई है।
3
જીવનનાં કલંકોની જ્યાં વાત નીકળી, શરાબીને કાળી ઘટા યાદ આવી.
जब जीवन के दाग़ों की बात चली, तो शराबी को काली घटा याद आ गई।
4
હજારી હસીનોના ઇકરાર સામે, મને એક લાચાર 'ના' યાદ આવી.
हज़ारों सुंदरियों के इकरार के सामने, मुझे एक लाचार 'ना' याद आई।
5
મહોબ્બતના દુઃખની એ અંતિમ હદ છે, મને મારી પ્રેમાળ મા યાદ આવી.
यह मोहब्बत के दुख की अंतिम सीमा है, मुझे मेरी प्यारी माँ याद आ गई।
6
કબરનો આ એકાંત, ઊંડાણ ખોળો, બીજી એક હુંફાળી જગા યાદ આવી.
कब्र की खामोशी और गहराई को सोचते हुए, वक्ता को एक और गर्म और आरामदायक जगह याद आती है।
7
એ શું પ્રેમ કરશે કે હર વાતે જેને, નિયમ યાદ આવ્યા - પ્રથા યાદ આવી.
वह कैसे प्रेम करेगा जिसे हर बात में नियम और परंपराएँ याद आती हैं?
8
સદા અડધે રસ્તેથી પાછો ફર્યો છું, ફરી એ જ ઘરની દિશા યાદ આવી.
मैं हमेशा आधे रास्ते से ही वापस मुड़ गया हूँ। क्योंकि मुझे फिर से उसी घर की दिशा याद आ गई।
9
કોઈ અમને ભૂલે તો ફરિયાદ શાની! ‘મરીઝ’ અમને કોની સદા યાદ આવી?
यदि कोई हमें भूल जाए तो शिकायत किस बात की? 'मरीज़', हमने खुद भी तो हमेशा किसकी याद रखी है?
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