“But to untie them, I have neither leisure nor courage, I know well where all the knots are in my current state.”
मुझे पता है कि मेरी वर्तमान स्थिति में कहाँ-कहाँ गाँठें हैं। पर उन सभी को सुलझाने के लिए न तो मेरे पास फुर्सत है और न ही हिम्मत।
यह शेर हमारे जीवन में आने वाली मुश्किल 'गाँठों' यानी समस्याओं और उलझनों के बारे में है। शायर को अपनी मौजूदा हालत में कहाँ-कहाँ ये गाँठें हैं, इसका पूरा इल्म है। वह जानते हैं कि कौन सी परेशानियाँ कहाँ उलझी हुई हैं। लेकिन, वे स्वीकार करते हैं कि इन गाँठों को खोलने के लिए न तो उनके पास फुर्सत है और न ही इतनी हिम्मत कि वे उनका सामना कर सकें। यह ऐसी भावना को दर्शाता है जहाँ हमें अपनी समस्याओं का भान तो होता है, पर हम उन्हें सुलझाने में असमर्थ महसूस करते हैं।
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