“If that were known, what joy would then abound,Whose partisan is God, on this earthly ground?”
अगर यह पता चल जाए कि ईश्वर इस दुनिया में किसका पक्षधर है, तो कितना आनंद आएगा।
ज़रा सोचिए, अगर हमें सच में पता चल जाए कि इस दुनिया में ईश्वर किसकी तरफ़ है, तो कितना मज़ा आए। यह दोहा इसी विचार को बड़ी ख़ूबसूरती से व्यक्त करता है। कवि कहता है कि अगर हमें भगवान की पसंद या वो किसका पक्ष लेते हैं, यह बात पता चल जाए, तो सब कुछ कितना स्पष्ट और शायद ज़्यादा आनंददायक हो जाएगा। यह हमारी उस गहरी इच्छा पर एक हल्की-फुल्की टिप्पणी है कि हम ईश्वर की इच्छा को समझना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि क्या ईश्वर का कोई विशेष पक्ष है। एक दिलचस्प ख़्याल है ना?
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