ग़ज़ल

यह मोहब्बत है या है उसकी दया, कहते नहीं

یہ محبت ہے یا ہے اس کی دیا، کہتے نہیں
मरीज़· Ghazal· 6 shers

यह ग़ज़ल प्रेम की अनिश्चितता और महबूब की चुप्पी को दर्शाती है, जहाँ वे न हाँ कहते हैं न ना। शायर अपने हृदय की गहरी कहानी को छुपाते हैं, अपनी भावनाओं और कमज़ोरी को व्यक्त करने से बचते हैं। यह ख़ामोश तकलीफ़ और अनकहे प्रेम के सार को छूती है।

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लिपि व अर्थ
1
આ મોહબ્બત છે કે છે એની દયા કહેતા નથી, એક મુદ્દત થઈ કે તેઓ હા કે ના કહેતા નથી.
क्या यह प्रेम है या उनकी दया? वे बताते नहीं हैं। एक लंबा समय बीत गया है, फिर भी वे हाँ या ना नहीं कहते।
2
જે કલાનું હાર્દ છે એની મજા મારી જશે, ક્યાંથી ક્યાંથી મેળવી છે પ્રેરણા કહેતા નથી.
जो कला का हृदय है, उसका आनंद चला जाएगा; वे बताते नहीं कि प्रेरणा कहाँ-कहाँ से प्राप्त की है।
3
લ્યો, નવાઈ આપની શંકા સુધી પહોંચી ગઈ, બસ હવે આગળ અમે દિલની કથા કહેતા નથી.
आपकी हैरानी अब शंका तक पहुँच गई है, इसलिए अब हम अपने दिल की कहानी आगे नहीं कहेंगे।
4
એને તું સંયમ કહે, તારી કૃપા, કિંતુ અમે, મનમાં નબળાઈ છે તેથી દુર્દશા કહેતા નથી.
आप इसे संयम या अपनी कृपा कहते हैं, लेकिन हम, मन में कमज़ोरी होने के बावजूद, इस दशा को दुर्दशा नहीं कहते।
5
એ જ લોકો થઈ શકે છે મહેફિલોની આબરૂ, જેઓ વેરાનીને પણ સૂની જગા કહેતા નથી.
केवल वही लोग सभाओं की शोभा बन सकते हैं, जो वीराने को भी सूनी जगह नहीं कहते।
6
બે જણા દિલથી મળે તો એક મજલિસ છે ‘મરીઝ’, દિલ વિના લાખો મળે એને સભા કહેતા નથી.
जब दो लोग दिल से मिलते हैं, तो वही एक सच्ची सभा है, मरीज़; बिना दिल के लाखों लोग इकट्ठे हों तो उसे सभा नहीं कहते।
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