ग़लत है ये कि दिल मेरा इधर हो या उधर होगा दोनों आलम से मुबर्रा है ख़ुदा जाने किधर होगा

“It is mistaken to believe my heart is either here or there; detached from both worlds, God alone knows where it may be.”

— ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
अर्थ

यह सोचना गलत है कि मेरा दिल यहाँ होगा या वहाँ; वह दोनों जहानों से परे है, ख़ुदा ही जाने कि वह किधर होगा।

विस्तार

शायर यहाँ दिल की बेपनाह आज़ादी और उसकी रूहानी कैफ़ियत को बहुत ख़ूबसूरती से बयां कर रहे हैं। आम तौर पर लोग दिल को इस दुनिया या आख़िरत के बंधनों में तलाशते हैं, लेकिन आशिक़ का दिल इन दोनों ही आलमों से बेनियाज़ हो चुका है। वह किसी तय ठिकाने पर नहीं, बल्कि उस ला-मकां मंज़िल में खोया हुआ है जिसकी थाह सिर्फ़ ख़ुदा को ही मालूम है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.