“Whoever came and sat within your street / Could never rise again, my friends—he only left in death.”
हे दोस्तों, जो कोई भी तुम्हारी गली में आकर बैठ गया, वह फिर कभी वहाँ से उठ न सका और केवल अपनी मौत के बाद ही वहाँ से गया।
उर्दू शायरी में महबूब की गली महज़ कोई रास्ता नहीं, बल्कि इश्क़ का ऐसा आस्ताना है जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं होती। शायर अपने दोस्तों से कह रहा है कि जो एक बार इस कूचे में आ बैठा, वह अपनी मर्ज़ी से कभी उठ न सका; उसका यहाँ से निकलना सिर्फ़ मौत के बाद ही हुआ। यह शेर इश्क़ के उस समर्पण को बयां करता है जहाँ आशिक़ की हस्ती पूरी तरह मिट जाती है, मगर उसकी निष्ठा कभी डिगती नहीं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
