बे-नियाज़ी में तुझ को क्या न हुआ अपने बंदों का तू ख़ुदा न हुआ

“In your sublime indifference, what did you not become? / Yet to your very own devotees, a God you never became.”

— ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
अर्थ

अपनी बेपरवाही और बेनियाज़ी में तू क्या कुछ नहीं बन बैठा, लेकिन अफ़सोस कि अपने ही बंदों के लिए तू सच्चा ख़ुदा न बन सका।

विस्तार

यह शेर एक बेहद ख़ूबसूरत और तीखा शिकवा है, जिसे महबूब और ख़ुदा दोनों के संदर्भ में समझा जा सकता है। शायर कहता है कि अपनी बेपरवाही और बेरुखी के घमंड में तुमने ख़ुद को इतना ऊँचा कर लिया कि तुम सब कुछ बन गए, मगर अफ़सोस कि उन्हीं के लिए मेहरबान न हो सके जो सच्चे दिल से तुम्हारी इबादत करते रहे। यह शेर हमें याद दिलाता है कि सच्ची बड़ाई या खुदाई बेरुख़ी में नहीं, बल्कि अपने चाहने वालों का सहारा बनने और उन पर रहम करने में है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.