नूर-ए-अहमद ने जब तजल्ली की सर-ब-सर ख़ल्क़ कूँ ये सूद हुआ

“When the Light of Ahmad shone forth in divine display, to all of creation, this boundless blessing made its way.”

— ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
अर्थ

जब हज़रत मुहम्मद (अहमद) के नूर का प्रकाश फैला, तब संपूर्ण सृष्टि को पूरी तरह से यह लाभ प्राप्त हुआ।

विस्तार

इस शेर में हज़रत मुहम्मद (अहमद) के पाकीज़ा नूर के ज़हूर को पूरी कायनात के लिए एक असीम रहमत बताया गया है। शायर कहते हैं कि जब उस रूहानी रौशनी की तजल्ली हुई, तो समूची सृष्टि और मख़लूक़ को बेपनाह फ़ायदा और बरकत हासिल हुई। यह शेर बड़ी सादगी से समझाता है कि यह नूर किसी ख़ास के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के हर ज़र्रे को संवारने और निखारने के लिए चमका था।

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