न होता हुस्न में यारो अगर जज़्ब तो रंज-ए-इश्क़ भी आसाँ न होता

“Were beauty not endowed with such attraction, friends, the pain of love would never be so easy to bear.”

— ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
अर्थ

हे दोस्तो, अगर सौंदर्य में खिंचाव या आकर्षण की शक्ति न होती, तो प्रेम का दुःख सहना भी आसान न होता।

विस्तार

शायर अपने दोस्तों से दिल की बात कहते हुए समझाते हैं कि हुस्न में एक अनोखा आकर्षण और खिंचाव यानी 'जज़्ब' होता है। अगर महबूब के सौंदर्य में दिल को अपनी ओर खींच लेने की यह जादुई ताक़त न होती, तो इश्क़ में मिलने वाले गहरे दर्दों और ज़ख़्मों को सहना नामुमकिन हो जाता। यह उस दिलकश कशिश का ही असर है, जो आशिक़ के लिए प्रेम की हर कठिन तकलीफ़ को भी सहने लायक और मीठा बना देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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