न होता दिल को जो अज़्म-ए-सफ़र तो जरस के तर्ज़ ये नालाँ न होता

“Were my heart not set upon a journey forth, / It would not wail in the manner of the caravan's bell.”

— ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
अर्थ

अगर दिल में सफ़र पर निकलने का इरादा न होता, तो यह कारवां की घंटी की तरह इस तरह विलाप न कर रहा होता।

विस्तार

यहाँ शायर ने दिल की बेचैनी और दर्द भरी पुकार की तुलना 'जरस' यानी कारवाँ की उस घंटी से की है, जो मुसाफ़िरों को रवानगी की चेतावनी देती है। वे कहते हैं कि दिल में मची यह तड़प बेवजह नहीं है, बल्कि दिल ने इश्क़ या मंज़िल की तलाश में किसी कठिन सफ़र पर निकलने का पक्का इरादा कर लिया है। यह विलाप दरअसल कमज़ोरी नहीं, बल्कि रवानगी का एक पुरदर्द और ख़ूबसूरत ऐलान है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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